श्री रामलीला सभा (रजि०) , ब्रह्मपुरी - बरेली

ब्रह्मपुरी(बमनपुरी) मे विगत 154 वर्षो से निरन्तर होली पर्व पर हो रही श्री रामलीला की प्राचीनता को देखते हुये उ. प्र. सरकार के संस्कृति विभाग ने प्राचीन विश्व धरोहर की श्रेणी प्रदान की हैं | इस श्री रामलीला को विश्व धरोहर की श्रेणी दिलाने मे बरेली के मेयर श्री ड़ा० आई. एस. तोमर व रामलीला सभा के अध्यक्ष श्री मुनीश शर्मा ने अहम भूमिका निभाई | रामलीला के आयोजन मे श्री रामकृष्ण प्रहलाद - महामंत्री, श्री अबिनाश शंखधार - कोषाध्यक्ष, श्री राकेश शंखधार - रथसारथी, का विशेष योगदान रहता हैं | गतवर्ष राम वारात के सफल संचालन मे श्री इन्द्रदेव द्रिवेदी, श्री सत्यवीर सिंह यादव का सक्रिय योगदान रहा |

ब्रह्मपुरी बरेली मे होली के अबसर पर श्री रामलीला के मेले का आयोजन को सुनकर लोग एकदम आश्चर्य मे पड़ जाते है क्योंकि सारे देश मे श्री रामलीला का मेला दीपावली से पूर्व अश्विन मास मे आयोजन होते है जो मुझे लगता है कि ग़लत है लेकिन जो परम्परागत विद्दानो के बीच विजयदशमी के नाम से श्री रामलीला के मंचन पर दशहरा मनाया जा रहा है तो वह भी किसी पौरािणक आधार पर ही मनाया जाता है जो उचित ही होगा |

हमारे भारतवर्ष मे एक हमारा उत्तर प्रदेश ही ऐसा है जहा हमारे आरध्यों के प्राक्ब्य हुए उसके अंतर्गत जिला बरेली जिसमे एक बड़ा महत्वपूर्ण मोहल्ला ब्रह्मपुरी है जो भारतवर्ष अपनी पहचान केवल श्री रामलीला महोत्‍सव मानने वह भी विशेषकर होली के अबसर पर श्री राम भगवान की शहर मे बारात निकाली जाने के नाम पर रंगो से भरपूर ठेके जिन पर मोर्चा खेलने हेतु सम्मानित जन अपने पंप ड्र्मो डाले बाजो के साथ चलते है इसका सौंदर्य एक झाँकी का रूप ले लेती है और होली महोत्सव मे चार चाँद लग जाते है जो विभिन्न मुख्य महानगर के मार्गो से अबीर गुलाल उड़ाती पुन: ब्रह्मपुरी वापिस आती है और फिर रात्रि मे होलिका दहन का कार्यक्रम सम्पन्न होता है, इसलिए ब्रह्मपुरी का अधिक महत्व एवम् रामलीला वाली अपभ्न्श शब्द बमनपुरी कहलाती है |

हमारे पूर्वज बताते थे कि यह बरेली मे चारो ओर भगवान शंकर के मंदिर है और सबसे अधिक पुराना भगवान नृसिंह जी के मंदिर के साथ ही पुराना शिवालय भी है जहा लोग पूजा अर्चना करते है और अपने आरध्य की पूजा करते परन्तु भगवान के शिव मंदिर से ऐसी आकाशवाणी हुई कि हमारी पूजा तो करते हो लेकिन हमारे आरध्य भगवान राम है जिनके गुणगान हम सभी को करना है | ऐसे बचनो को श्रवणकर ब्रह्मपुरी के विद्दानो खलवली हुई क्यों ब्रह्मपुरी मे अधिकतर विद्धान ब्राह्मण कर्मकांडी .वेदपाठी और भगवान की भक्ति मे लीन रहने वेल ही रहा करते है देखादेखी प्रारम्भ मे कुछ बालक कन्हैया टोला मे स्थित श्री राम मंदिर मे तीर कमान भगवान श्रीराम के रूप मे खेलते हुए श्री नृसिंह मंदिर मे भी टोली बनाकर खेलते हुए कोई लक्ष्मण कोई हनुमान आदि अपने बताते आते |

हमारे माननीय

फोटो गैलरी